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मिलये कटिहार के तानसेन से

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कटिहार/नीरज झा :-- संगीत के क्षेत्र में तानसेन का योगदान सर्वोपरि माना गया है और संगीत और तानसेन दोनो एक दूसरे के पूरक माने जाते है बताया जाता है कि संगीत का मूल स्रोत वेद है शायद यही वजह है सभी को संगीत पसंद भी है।




कटिहार मे तानसेन के नाम से प्रचलित एक दिव्यांग जिनकी पाँच साल की उम्र मे आँख की रोशनी चली गई लेकिन जिंदगी से हार नही मानी और संगीत से ही लोगो के जिंदिगी मे रोशनी फैलाने लगे लोग दुर्गा प्रसाद विश्वकर्मा को कटिहार का तानशेन की उपाधि लोग देने लगे है ।
 पहले महामारी की तरह फैलने वाली चिकन पॉक्स  (गोटी) से इनकी आँखो की रोशनी पाँच साल की उम्र मे चली गई इनकी जिंदिगी वीरान सी हो गयी लेकिन जिंदगी की जद्दोजहद ने भजन गायन की ओर झुकाव कर दिया इसी दौरान कटिहार मै न्यूज पेपर में काम करने वाले मुंगेर के सटे जमालपुर के रहने वाले जार्ज नामक अंग्रेज ने संगीत की शिक्षा दी   ।
अपनी दोनो  आँख की रोशनी जाने के वाद लाचारी को बोझ नही समझा और संगीत से ही  नये जीवन की शुरू कि और आज दुर्गा प्रसाद विश्कर्मा को कटिहार के तानसेन के नाम से लोग जाने लगे है।
आठ भाई बहन मे सबसे बड़े दुर्गा प्रसाद विश्वकर्मा का जन्म 1933 को हुवा था इनके पिता स्व राम किसुन विश्वकर्मा कटिहार जुट मिल मे कार्यरत थे और तंगी के हालात में अपने बच्चों की परवरिश की दुर्गा प्रसाद विश्वकर्मा का बचपन अभावों मे गुजरी ऊपर से चिकन पॉक्स ने दोनों आँखो की रोशनी छीन ली लेकिन बुलंद हौसला ने संगीत की अच्छा जानकारी होने मे मदद की और कटिहार के तान सेन बन गये । कटिहार के तानसेन के नाम से मशहूर दुर्गा प्रसाद विश्वकर्मा के शागिर्द की लंबी भेरिस्ट है संगीत प्रेमी छात्र छात्रा घर के आगे खड़े होकर अपने आँख से नही देखने वाले गुरुजी का इंतजार अपने घरों के आगे खड़े होकर करते है जैसे ही गुरु जी आता हुवा दिखता है उन्हें उनके शागिर्द अपने साथ लेकर रियाज करने बैठ जाते है ।
 कटिहार के रहने वाले उनके शागिर्द आनन्द कुमार ने बताया कि बचपन से ही संगीत अपने गुरुजी से सिखा और आज देश के कई नामी-गिरामी यूनिवर्सिटी में संगीत मे कटिहार के साथ साथ अपने आँख से लाचार गुरु का नाम रौशन किया ।
सरकार के तरफ से नही मिल रही है कोई सुविधा
बिहार सरकार के अंत्योदय योजना का लाभ आँख से लाचार दुर्गा प्रसाद विश्वकर्मा को नही मिल रहा है  कुछ वर्ष पहले तक 30 किलो चावल गेंहू  मिला करता था लेकिन अधिकारियों ने अब बंद कर दिया है बिहार सरकार के अधिकारी कटिहार के संगीत के महान जादूगर को सिर्फ 400 रुपया का वृद्धा पेंशन देकर उनके नियति के भरोसे छोड़ दिया गया है ।

©www.katiharmirror.com

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