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बिना नौकरी ही मिलती है तनख्वाह

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कटिहार/नीरज झा;-- कटिहार जिले मे मूल्यांकन केंद्र से मेट्रिक की कॉपी शिक्षा माफिया द्वारा गायब होने का मामला अभी जाँच चल ही रह था कि  सालो से गायब चल रहे शिक्षक को बिना नौकरीकरी किये ही सेलरी देते रहने का मामला सामने आया है । इस मामले मे शिक्षा विभाग को लाखो का चुना लगा है|...


बिहार के कटिहार मे सेल्फी लेकर उपस्थिति दर्ज कराते है गुरुजी |लेकिन कटिहार जिले के अधिकारियों पर गुरु जी की जाँच का जिम्मा था फिर भी  सालो से गायब रहे कटिहार जिले के डंडखोर प्रखंड के उत्क्रमित मध्य विद्यालय संगत टोला के नियमित शिक्षक शशिकांत पटवे को बेरोक टोक पेमेंट होती रही|

गायब शिक्षक की जब पड़ताल की तो उत्क्रमित मध्य विद्यालय संगत टोला के हेडमास्टर लाल विहारी पासवान ने खुल कर कहा पर BRP के रूप में डंडखोरा मे चयनित है और डडखोरा संकुल मे कार्यरत है वही राजकीय उच्य विद्यालय के प्रधानाध्यपक  लुकमान अंसारी जो DDO के कार्यभार मे है ने उन्होंने कहाँ की प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी अरविंद सिन्हा के द्वारा शिक्षक शशिकांत पटवे का  अपसेंटी दिया जाता है और उनकी नियमित सैलरी यहाँ से बनती है ।


भ्रष्टाचार का खेल शिक्षा विभाग में  इस कदर व्याप्त है प्रखंड संसाधन केंद्र पर वर्षो से गायब शिक्षक को साधन सेवी के रूप मे पदस्थापित कर सैलरी मोटी तनखाह दी जाती रही इसके देख रेख करने वाले अधिकार ही साधन सेवी के दिशा निर्देश के तहत अहर्ता नही पूर्ण करने वाले साधन सेवी (BRP) के रूप में पदस्थापित कर दिया जाता है । प्रखंड संसाधन केंद्र डंडखोरा में बीआरपी के पद पर कार्यरत लोगो के बारे में सर्व शिक्षा अभियान से इसकी पड़ताल की गई पता चला  डंडखोरा मे दो BRP का चयन किया गया है और चयनित पत्र में शशीकांत पटवा का नाम नहीं है साथ ही तहकीकात में कई बातें खुलकर सामने आई श्रीकांत पटवा किसी भी विषय से आवेदन नहीं डाला था अब जांच का विषय है कैसे शशिकांत पटवा को बीआरपी नियुक्त किया गया जबकि बीआरपी सीआरसी चयन संबंधित नियमावली के अनुसार 1 दिन भी बीआरपी या सीआरसी पूर्व में रह चुके हैं तो इसके लिए योग्य नहीं होगा जबकि इससे पूर्व बीआरपी के रूप में शशिकांत पटवे मैथ के BRP के रूप मे कार्य कर चके है दूसरा सबसे बड़ा सवाल बीआरपी सीआरपी नियमावली के अनुसार शैक्षणिक आहर्ता MA है जो इस तथाकथित बीआरपी शशिकांत पटवे के पास नहीं है अब सवाल उठना लाजमी है किस दबाव और किस आदेश से शिक्षा विभाग के अधिकारी सारे नियमों को ताक पर रखकर सालों से गायब शिक्षक को बीआरपी बनाकर बचाने का प्रयास कर रहे हैं ।
शिक्षा के क्षेत्र में कार्य गैर सरकारी संगठन ( एनजीओ) प्रथम (Annual Status Of Education Report) 2018 ने अपने सर्वे रिपोर्ट में कई चौंकाने वाले खुलासे मानव संसाधन  के सामने रखा है 6 से 14 वर्ष  52% बच्चे पांचवी क्लास में पढ़ते हैं वह दूसरी क्लास के गणित के सवाल हल नहीं कर पा रहे हैं गणित जैसे महत्वपूर्ण विषय के शिक्षक वर्षों से विद्यालय से गायब रहेंगे इसमें गरीब नौनिहाल का क्या कसूर

©www.katiharmirror.com

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