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मखाना की खेती करने वाले किसान मौसम से परेशान।

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कटिहार/ बरारी/नरेश चौधरी-
बरारी प्रखंड क्षेत्र में मखाना की खेती की ओर यहाँ के किसान तेजी बढ़ रहे है। कई पुराने गहरे व ऊँचे जमीन को समतल कर मखाना के खेती कर रहे किसानों की  तक़दीर बदल रही है।



बल्कि सैकड़ों हेक्टेयर की जल जमाव वाली जमीन को भी उपजाऊ बना दिया है। जिससे आस बढ़ गयी कटिहार जिला केलाचंल व मक्का की कटोड़ी के नाम से प्रसिद्ध है वही यहां किसान अब मखाना की खेती पर भी जोड़ दिये हुए है। पिछले वर्ष मखाना में उछाल और बजार भाव तेज रहने से किसानों ने इस दफे मखाना के खेती पर ज्यादा जोड़ दिया है। कटिहार जिले के बरारी, फलका, कोढ़ा ,प्राणपुर व हसनगंज में मखाना की खेती ज्यादा होती है मखाना की खेती वैसे जगहों पर होती हैं जहां पानी तीन से चार फीट लगा होना चाहिए। किसान मखाना खेती फरवरी माह में से लगाना शुरु कर पटवन, खाद, कीटनाशक छिड़काव आदि के साथ जुलाई माह से गुड़िया (काला हीरा) निकलनी शुरु हो जाती है जिसमें लागभग एक एकड़ खेती में लीज पर खेती करने पर अगर बारिश का साथ मिल तो 25 से 30 हजार का खर्च आता है अगर बारिश ना हो तो 35 से 40 हजार खर्च होती है एक एकड़ में करीब 25 से 30 हजार तक की लाभ होती है पिछले वर्ष गुड़िया का बढ़ते भाव और लावा के चढ़ते दाम ने मखाना किसानों को इसकी खेती की और किसानों को प्रेरित किया है।
                स्थानीय किसान मो खुशबुर, नैमुल, यूसुफ, तौकीर, शमीम, जमाल, हलेश्वर, अफजल हुसेन, अब्दुल तवाव, मुख्तार, अताउर आदि बताते है कि पिछले वर्ष मखाना की कीमत मे उछाल रहने के कारण गुड़िया का बजार भाव अच्छा रहा था वही इस बार खेती भी बढ़ी है सरकार द्वारा अगर मखाना की खेती को प्रोत्साहित किया जाय तो किसानों में इसकी खेती की ललक और बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि जिस हिसाब से धूप व तापमान बढ़ रहा है इससे मखाना खेत का पानी तुरंत सुख जाता है, हर तीसरे दिन पम्पसेट आदि से पटवन करने को विवश है, एक बीघा में एक दिन की पटवन में करीब 900 रुपया का ख़र्चा आता है। जो कि अभी तक 25 पटवन हो चुका है। आगे 25 पटवन और करना है।
किसानों ने कहा कि हमलोगों को मखाना खेती के लिए सब्सिडी मिलनी चाहिए।
          बता दे कि बरारी के काढ़ागोला रेल से मखाना महानगरों में भेजा जाता है यहाँ का मखाना दिल्ली, मुम्बई, कानपुर,अमृतसर, ग्वालियर सहित पाकिस्तान भी भेजा जाता है। व्यपारी बताते है आने वाले समय में देश-विदेश से मखाना की और मांग बढ़ेगी। क्योंकि मखाना की खपत प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। जानकार बताते है कि शहरों में लोग नाश्ता में मखाना ही खाते है इसमें प्रोटीन, मिनरल और कार्बोहाइड्रेट प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। जिस वजह से लोगों में इसका डिमांड बहुत तेजी से बढ़ रहा है।
               इस संबंध में प्रखंड कृषि पदाधिकारी महेंद्र राय का कहना है कि इस तरह की खेती के लिए अनुदान अधिकतम दो हेक्टेयर यानी करीब पांच एकड़ तक लघु व मध्यम वर्ग के किसानों को उद्यान कार्यालय जिला के द्वारा अनुदान आवेदन कर जांच के उपरांत प्रखंड कृषि समन्वयक पदाधिकारी उस किसान के खेत पर पहुँच कर मखाना के खेत व किसान का फोटोग्राफी कर विभाग को भेज दिया जाता है उसके बाद जांच कर अनुदान किसानों के खाता में  आरटीजीएस के माध्यम से प्रति हेक्टेयर 16 हजार बीस रूपया भेजा जाएगा ।

©www.katiharmirror.com

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