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सीमांचल के साथ साथ कटिहार मे वोट पर भूख भारी । स्पेशल रिपोर्ट

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कटिहार/नीरज झा:-- देश लोकतंत्र का महापर्व मना रहा है सात चरणों मे इस उत्सव से पहले मुहं मोड़ कर हजारो गाँव का परिवार मतदान से पूर्व सीमांचल क्षेत्र के गांव का गाँव कर रहा है पलायन कर रोजाना कटिहार रेलवे स्टेशन पहुंच रही है हजारो की भीड़ |इससे ट्रेन के गार्ड से लेकर रेल पुलिस तक मतदान बेहद जरूरी के लिए मुसाफिर परिवारों को कर रहा है जागरूक पर पेट की भूख की आग में परिवार और बच्चो की बिगड़ती भविष्य देख युवा महिला वृद्ध ग्रामीणों ने मतदान पर उठाया बड़ा सवाल पापी पेट का है |


सवाल ट्रेन पकड़ने को लेकर स्टेशन पर मची है भगम-भाग रेल की बोगियों से लेकर शौचालय भी भरा पड़ा है इंसानों से खचा-खच जो सुखाड़-बाढ़ क्षेत्र से निकलकर रोज एक बड़ी आबादी भूख की खातिर पलायन कर रहा है । पलायन करने वाले लोगों मे बेबी, किरण, मनोज यादव, मोहम्मद जुबेर, प्रदीप यादब,  रुक्मणी, टुनटुन ऋषि आदि लोगों से बात करने पर चौंकाने वाला खुलासा हुआ |





        गरीबों को वोट से पेट की महत्व ज्यादा होती है इसलिए तो इन लोगों ने पेट की खातिर वोट को छोड़ मेहनत मजदूरी के लिए दिल्ली, पंजाब, लुधियाना जाना बेहतर समझा लोगों का कहना है कि काम नहीं करेंगे तो खाएंगे क्या नेता को वोट देने से कोई फायदा नहीं होता घर में खाने को लाले पड़े हैं, बच्चे भूखे बिलख रहे हैं, वोट वहां गिराया जाता है जहां इससे कोई फायदा हो जब नेता लोग जीतने के बाद कोई काम नहीं देता तो वोट गिराने से क्या फायदा यहां कोई काम धंधा नहीं रहा बाल बच्चों के साथ बहुत मुश्किल से जी रहे हैं  हर वर्ष बाढ़ कटाव सुखाड़ जैसे प्राकृतिक आपदा से परेशान हैं। चुनाव के बाद सरकार बनती है, हम जैसे थे वैसे रहते हैं वोट वही देगा जिसका यहां पेट भरेगा इस तरह देखा जाए तो बिहार सीमांचल के साथ साथ कटिहार से भी मजदूरो का पलायन हो रहा है लोग चुनाव को दरकिनार कर पेट के कारण बाहर जा रहे हैं। अगर इन लोगों में जागरूकता नहीं फैलाई गई तो ग्रामीण क्षेत्र में महापर्व का प्रतिकूल असर पड़ेगा।




      कटिहार रेल पुलिस के ए एस आई एसपी दास ने बताया कि हम लोग बोगी बोगी में जाकर लोगों को समझा रहे हैं कि मतदान हो जाएगा जाइएगा पर लोग मानने को तैयार नही है कहते है पेट की भूख के सामने भला कैसा महापर्व पहले पेट तब वोट चौकिये नहीं हजारों की भीड़ काफी है समझने और समझाने के लिए कि कटिहार समेत सीमांचल इलाके से इनलोगों का वोट से कोई वास्ता नहीं गरीबी और बेरोजगारी की पट्टी इनके आंखों में इस कदर बंधी है कि देश में लोकतंत्र के महापर्व की चकाचोंध इन्हें दिखाई नहीं देता इन्हें सताती है तो पेट की भूख इसलिए सत्ता पर काबिज होने के लिए उन नेताओं को जिताने के लिए अपने वोट को  क्यों दें
नेता का काम है वोट के समय जनता के पास आना और अपना मतलब निकलना आखिर जनता क्या करे नेता चुनाव जितने के बाद दुबारा न इनके पास आते हैं और न जनता की सुनते हैं इधर कर्ज लेकर अपना परिवार जनता कब तक पाले । इलाके में न तो कोई रोजगार है और न कोई इनके पेट की सुध लेने वाला हजारों की संख्या में ये गरीब परिवार पापी पेट के लिए निकल जाता है दिल्ली-पंजाब और अन्य राज्यों में रोजगार की खातिर ।
कटिहार से गुजरने वाली कर्मभूमि एक्सप्रेस से..
जो चुभती निगाहें बेबस होकर दौड़ते गिरते पड़ते निकल पड़े अपने कर्म की खतिर ...बिहार के कटिहार से जरा सोचिए देखिये इन भीड़ को ट्रेन में चढ़ने के लिए कितना मारा मारी है किस कदर ट्रेन के डब्बे में खुद को ठूसने के लिए मजबूर है लोग जब यात्री बोगी में जगह नहीं मिली तो कैसे शौचालय में खिड़की के रास्ते खुद और अपने परिवार को समेट लिया आखिर पेट की खातिर रोजगार की तलाश में जो जाना है
इधर लोकसभा चुनाव के तिथि की घोषणा होते ही भारतीय रेल की तरफ से भी यात्रियों के बीच वोट देने के लिए जागरूक किया जा रहा है..रेल पुलिस और ट्रेन के गार्ड ट्रेन के कुप्पे कुप्पे में यात्रियों के बीच अपना मतदान-वोट देने के लिए यात्रियों को जागरूक कर तो रही है लेकिन इसका कोई असर पेट के भूख पर नहीं पड़ने वाला है ।

©www.katiharmirror.com

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