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बिहार के कटिहार सहित कई जिलों में प्रवासी पक्षियों का हो रहा तस्करी: विभाग मौन

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कटिहार/नीरज झा :---- कटिहार जिले के फलका थाना क्षेत्र के सीमावर्ती क्षेत्र मे प्रवासी पक्षियों का आना मौत को दावत देना बनता जा रहा है । यहाँ सिर्फ शिकार ही नहीं हो रहा है धड़ल्ले से  बिक भी रहा है ।


  कटिहार जिले के गंगा और कोशी नदी का खुले क्षेत्र में विचरण करने पहुँचने वाले प्रवासी पक्षियों सहित देशी पक्षियों का शिकारी शिकार कर  जिले के नामचीन ढाबा एवं रेस्तरों के साथ साथ  ग्रामीण इलाकों में ऊंची कीमत लेकर बेच कर ऊँची कीमत वसूल रहे हैं। जानकर बताते है कि शिकारी देर रात नदियों के किनारे जाल बिछाते हैं और सुबह में ही पक्षियों को पकड़ कर संगठित पक्षी माफियों को बेच देते हैं फिर पक्षी माफ़िया फिर मोटी रकम तय कर होटलो ढाबा और रेस्तरों में बेच देते हैं जहाँ इन अप्रवासी  पक्षी के मांस के शोखिनो को मुंह माँगी कीमत लेकर ग्राहकों के सामने परोसी जाती है ।
मेहमान प्रवासी पक्षियों के  संरक्षण को लेकर जहां सरकार इतनी सजग है इसके लिये सरोवरों के विकास पर लाखों रुपये खर्च कर प्रवासी पक्षियों को बचाने में लगा है वहीं सरकारी विभाग मोन बनकर मूक दर्शक बन कर तमसा देख रही है ।  सीमांचल के कटिहार पूर्णिया  अररिया  किशनगंज सुपौल जिले सहित भागलपुर ,खड़िया व नवगछिया में आने वाली लालसर और मुर्गाबी  डॉक पक्षी का धड़ल्ले से शिकार हो रहा है ऐसा भी नहीं है कि इसकी जानकारी महकमे को नहीं है लेकिन इसके बाद भी अभी तक इन पक्षियों का शिकार करने वाला एक भी शिकारी नहीं पकड़ा गया इससे लगता है कि वन कर्मचारियों की मिलीभगत से इन पक्षियों का शिकार हो रहा है एक जानकार ने हमे नाम न छापने की शर्त पर पक्षियों के शिकार के बारे में कई संगीन राज खोले उन्होंने बताया कि इस बार न सिर्फ शिकार बढ़ा है बल्कि इन पक्षियों का रेट भी बढ़ गया है उन्होंने बताया कि इन विदेशी पक्षियों की कीमत दो हजार से तीन हजार रुपये किलोग्राम आसानी से बिक जाता है कटिहार के गोगल झील व गंगा व कोशी नदी तथा पूर्णिया कोशी नदी व जलाशय एवं भागलपुर व नवगछिया के गंगा में यह शिकार बखूबी किया जाता है  सूबे के पटना से पूर्णिया एनएच 31 पर नवगछिया के बिरबन्ना चौक मार्ग पर खुलेआम इन जिंदा पक्षियों को बेचते आसानी से देखे जा सकते हैं ।
भीआईपी गाड़ी देख कर ये चिड़ीमार हाथों में पक्षियों को लेकर दौड़ पड़ते हैं वहीं पुलिस की गाड़ी दूर से देखते ही सड़क के किनारे गाँव में छिप जाते हैं  उनका कहना था कारवाई तो नहीं करते हैं साहब लेकिन सभी पक्षियों को छीन कर थाना लेकर चले जाते हैं  उनका कहना था बड़े हाकिमों भेंट स्वरूप देने के लिए आधे कीमत पर खरीद कर भी स्थानीय हाकिम ले जाते हैं

©www.katiharmirror.com

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