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वन्दे मातरम या राष्ट्रगान को धर्म से न जोड़े : नित्यानद राय

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कटिहार/नीरज झा ;---आजादी के समय से ही देश को एक सूत्र मे बाँध कर रखने वाले राष्ट गान पर कुछ लोग राजनीति करने लगे है । सरकारी विद्यालय के गुरुजी अफजल हुसैन ने संविधान मे राष्ट गान गाना जरूरी नही है अपने तर्क पर आज भी अडिग हैं |साथ ही धर्म भी इसकी इजाजत नही देता है ऐसा भी इनका कहना है |


जिस तिरंगे के नीचे खड़ा होकर सभी को एक समानता का पैगाम दिया जाता हो जिस राष्ट्रीय गान गाकर हँसते हँसते शहीदों ने अपनी जान की बाजी लगा दी उसी राष्ट गान को धर्म से जोड़ कर मनिहारी प्रखंड के प्राथमिक विद्यालय अब्दुल्लापुर के प्रभारी प्रधानाध्यापक अफजल हुसैन गाने से मना कर दिया| जिसको लेकर विद्यालय मे गणतंत्र दिवस के दिन विद्यालय रण क्षेत्र में तब्दील हो गया |किसी ने इसका वीडियो बना कर वायरल कर दिया जिसकी जाँच करने पर सच पाया गया था |

 इसको प्रमुखता से सब से पहले हमने आम लोगो के बीच रखा था |






इस मामले में बिहार भाजपा प्रभारी नित्यानंद राय ने कहा कि वंदे मातरम बोलने से कतराते हैं वो इस देश को धोखा दे रहे हैं और उन स्वतंत्रता सेनानियों को उन वीर शहीदों को जो वंदे मातरम कहते कहते आजादी के दीवाने फांसी के फंदे तक चुम लिया, वो वंदे मातरम के महामंत्र से कतराने वाले लोग निश्चित रूप से देश प्रेम की भावनाओं से कहीं न कहीं थोड़ा या बहुत या ज्यादा या बिल्कुल दूर ही होंगे, वैसे लोगों को समझना चाहिए, मैं उनसे आग्रह करता हूँ कि इस भारत की मिट्टी में रहकर जो वंदे मातरम का विरोध करते हैं उनको नहीं करना चाहिए और वैसे प्रश्रय देने वाले लोगों को जैसे तेजस्वी यादव जी ने भी वंदे मातरम का खिलाफ और भारत तेरे टुकड़े होंगे कहने वाले कन्हैया के साथ मंच साझा किए थे |और आज कहते हैं कि भारत इसी के बाप का नहीं है तो भारतीय जनता पार्टी भी तो यही कहती है कि भारत सबके बाप का है और सबके बेटा का भी है इसका ख्याल सबको रखना चाहिए पूर्व उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादब को भी ख्याल रखना चाहिए और भारत किसी के बाप का नहीं है |
लेकिन पाकिस्तान का बाप हिंदुस्तान ही है| न तो पाकिस्तान में जो आज हिंदुओं की वहां जो स्थिति है, आजादी के समय हिन्दू वहां 15 प्रतिशत से 2 प्रतिशत पर आ गए..इसका भी ख्याल तेजस्वी जैसे नेताओं को रखना चाहिए और इसका ख्याल करना चाहिए हिंदुस्तान की भूमि में आज वैसे लोग जिनके लिए भारत की भूमि है हिंदुस्तान की संस्कृति में हिंदुस्तान पर विश्वास करने वाले लोग इस दुनिया के किसी कोने में हैं हिंदुस्तान में उनका स्वागत है और हिंदुस्तान की भूमि में रहकर वंदे मातरम का विरोध करने वाला का भारतीय जनता पार्टी कड़ा विरोध करती है ,घोर निंदा करती है |
वंदे मातरम कहना ही चाहिए, किसी की पूजा पद्धति कुछ भी हो उपासना पद्धति कुछ भी हो ,वंदे मातरम को धर्म से नहीं जोड़ा जा सकता और उनलोगों को खुदीराम बोस को याद करना चाहिए, असफाक उल्लाह ,को भगत सिंह को याद करना चाहिए सारे लोगों ने वंदे मातरम कहते कहते फांसी को चूमा था ।





अब सवाल यह उठ रहा ऐसे गुरुजी विद्यालय मे गणतंत्र दिवस के मौके पर राष्ट्रीय गीत गाने से परहेज करते है वो छोटे छोटे नोनिहालो को देश भक्ति की क्या शिक्षा देते होंगे

डिस्क्लेमर : राष्ट्रिय गान का सम्मान हरेक भारतीय के लिए अनिवार्य है | गाना या न  गाना व्यक्तिगत मुद्दा है |


 ©www.katiharmirror.com








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