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माँ की भक्ति मे रिक्शा चालक बना मूर्तिकार ।

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कटिहार/बरारी/नरेश चैधरी :-- गरीबी केशो पासवान के सामने पढ़ाई मे बाधक बन कर खड़ी हो गयी थी और पेट मे लगी भूख की आग ने रिक्शा  चालक बन कर पेट की भूख मिटाने का प्रयास किया था इस निर्धता ने ज्ञान की देवी मां सरस्वती की मूर्ति खरिदने  की ताकत नही थी । निर्धनता मे खुद के हाथों से मूर्ति बनाने का फैसला ले लिया और आज बन गया मूर्तिकार ।


 
सभी लोग ज्ञान की देवी कहे जाने वाली माँ शारदे की पूजा अर्चना धूम धाम से करते है  लेकिन बरारी प्रखंड के रहने वाले  केशो पासवान कई दशक पहले गरीबी के तंगी ने बीच में ही पढ़ाई छोड़ने को मजबूर हो गया और अपने और अपने परिवार के पेट की आग को बुझाने के लिये कटिहार आकर भाड़े का रिक्सा  चला कर भरण पोषण करने को मजबूर हो गया |

इस निर्धनता के आगे माँ शारदे की पूजा अर्चना करने के लिये मूर्ति खरीदना संभव नही हो पा रहा था उसने माँ सरस्वती की मूर्ति खुद अपने हाथों से बना कर पूजा अर्चना किया । कभी पैसे की तंगी से मूर्ति नही ख़रीने बाले केशो पासवान और उनकी पत्नी रिमनी देवी ने दुर्गापुजा ,काली पुजा के साथ सभी पर्व त्योहारों मे सभी देवी देवताओ की मूर्तियां बनाकर लोगो के साथ साथ पूजा पंडालो मे देने लगे और जब यह कारोवार  फल फूल रहा है और  इस कारोबार मे सिद्ध हस्त हो कर अपने और अपने परिवार का भरण पोषण कर रहे है । केशो पासवान ने माता सरस्वती का आशीर्वाद मानते हैं एक मामूली सा रिक्शा चालक जो दाने दाने के लिए मोहताज था अपने हाथों से मूर्ति बनाकर पूजा उपासना के बाद आज कुशल मूर्तिकार बन कर कटिहार के बरारी क्षेत्र नाम कमा रहे है

©www.katiharmirror.com








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