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कटिहार में सैकड़ो बीमार गायों की सुध लेने वाला कोई नहीं ?

जिस  देश की सियासत में गाय अपनी पहुँच रखती हो, जिस कटिहार शहर मे लगभग एक दर्जन मामले गौ सेवको पर दर्ज हो उसी कटिहार के कई गांव में हजारों गाये बीमार है पर किसी ने इसकी सुध नही ली  ना नेता ना प्रशासन ना अधिकारी । हमने जब खबर उठाई तब संबंधित विभाग के बाबुओ की नींद खुली औऱ राहत पहुंचाने का एवं इलाज के लिए कैंप लगाने का भरोसा दिया है ।







कटिहार शहर से सटे दलन पंचायत के कई गांवो मैं पशु पालन मुख्य व्यवसाय सदियों से रहा है इस पशु धन से जीवोपार्जन  करते आरहे है यहाँ के लोग  लेकिन विगत कुछ दिनों से यहां के किसान काफी परेशान चिंतित है , हो भी क्यों ना उनके दुध देने वाले पशुवो मैं खुराहा रोग से मवेसी बीमार हो कर मर रहे है जिससे किसानों को आर्थिक संकट के साथ-साथ क्षेत्र में  दूध की भारी किल्लत हो रही है ।



दलन पूरब की पशुपालक गीता देवी ने बताई 8 भैंस पालकर अपने परिवार का जीवकोपार्जन करते आ रहे है यही मुख्य व्यवसाय भी है |
सभी भैंस बीमार है ना कुछ खाता पिता है और ना ही दूध देता है |जानकारी देने और मवेशी के डॉक्टर से मिलकर दवा लेने कटिहार ब्लॉक पहुँचे तो बंद पड़ा था ऑफिस ।
 पुतुल देबि ने भी तक़रीबन यही बताया कि इसक्षेत्र में कई गायो की मौत हो चुकी है पशु ना कुछ खाता है और ना ही उठ पता है ।

स्थानीय  नीता देबि ने बताया पूरे छेत्र मैं हजारों की संख्या मे दुधारू पशु बीमार है |आर्थिक तंगी होने के बाद भी लोग अपने पशु को बचाने  का भरसक  प्रयास कर रहे हैं |हम कई हजार की दवा खरीद कर इलाज करवा चुके है  सरकारी डॉक्टर मिल नहीं पाते हैं विभाग के मूकदर्शक बनी हुई हैं ।



क्या कहते हैं आला अधिकारी
जिले के जिला पशुपालन पदाधिकारी डॉ प्रमोद प्रसाद मेहता बताया कि जो प्रभावी  पशुपालक हैं हमसे मिलना चाहिए था या कटिहार पशु अनुमंडल अस्पताल जो नगर निगम में है दवा और डॉक्टर मौजूद है पूरे जिले मे 28 पशु चिकित्सालय हैं जहां चिकित्सक और दवा मौजूद है वहाँ भी पशुपालक अपने पशु को दिखा कर इलाज करवा सकते है | इसमे कोई परेशानी हो तो कैंप लगाकर समुचित इलाज और सुविधा दी जाएगी पशुपालकों को ।
डॉक्टर मेहता ने बताया खुराहा रोग से बचने के लिए प्रतिवर्ष दो बार पांच लाख पाँच हजार छह माह पर पशुवो को टिकाकरण किया जाता है  लेकिन कुछ क्षेत्रों में पशुपालक टीकाकरण नहीं करवाना चाहते हैं जिस से खुराहा बीमारी पर पूर्ण रूप से खत्म नही हो पाता है यह एक वायरल बीमारी है जिससे दूसरे मवेशी संपर्क में आने के बाद उसे भी हो जाता है  इसी तरह फैलता है जब तक 100% टीकाकरण  नही हो पायेगा पूर्ण रूप से खुराहा बीमारी खत्म नही होगी  एक भी पशु टिकाकारण से छूट जाने से ये बीमारी फिर शुरू हो जायेगी । त्योहारों के इस मौसम में दुधारू पशुओं के बीमार होने से जहां दूध की भारी किल्लत हो गई है वहीं पशुपालक के चेहरे से खुशियां नदारद थी |

कुमार नीरज

©www.katiharmirror.com
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