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कटिहार के फलका में मृत राजा छह साल बाद लौटा संतोष बनकर ?

कटिहार के फलका में अजीबो गरीब घटना को लेकर लोग पशोपेश  में है -कोई अफवाह तो कोई उपर वाले का कोई करिश्मा बता रहे है ।
पिछले दिनों वभनी गाँव मे मनसा पूजा के उपलक्ष में झारखंड के साहबगंज के सकरी से गायन करने आये एक युवक को भूसी महतो के परिजन अपना पुत्र बता रहै है ।
परिजन का कहना  है कि बरेटा हाई स्कूल मे 9वी कक्षा में पढ़ने वाले छात्र राजा की मौत खेत मे पटवन करते समय सर्प दंश से हो गयी थी |इलाज के दौरान राजा की मृत्यु हो गयी थी । मृत राजा की लाश को हिन्दू धर्म के मान्यता के अनुसार सर्प दंश से मृत लाश को जलाया नही गया इस मृत लाश को गंगा मैं प्रवाहित कर दिया गया ।
संतोष या राजा? 






मृत राजा की लाश गंगा की तेज लहरों ने साहबगंज पहुँचा दिया |अब सवाल ये है कि क्या  जाते जाते वो जीवित हो गया ?वहाँ के लोगो ने इसको संतोष नाम देकर पालन पोषण किया और मानसा पूजन मैं गायन करने वाले लोगो के साथ रहने लगा जो दो दिन पहले कटिहार पहुँचा था |गायन करने वभनी गांव वहाँ इसकी पहचान पुत्र के रूप मे भूसी महतो ने बचपन मे सायकिल से पैर काटे चिन्ह से अपने पुत्र के रूप में राजा के रूप मे की ।

 संतोष के साथ झारखंड के सकरी से आये लोगो ने ने भी बताया कि संतोष को गंगा में बहता हुआ पाया गया था जो जीवित था । लेकिन राजा बना संतोष अपने पुराने घर के परिजन को पहचानने से इंकार कर रहा है लेकिन राजा बना संतोष के परिजन अपने पुत्र मिलने की खुशी में फूले  नही समा रहे है |


अब ये तो शायद समय ही बता पायेगा के ये केवल एक संयोग मात्र है या फिर गंगा जी की पवित्र लहरों ने सचमुच के मरणासन्न लड़के को नया जीवन दान दिया है |

कुमार नीरज

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