सरकारी डोंगल की कहानी- पास्पोर्ट की ज़ुबानी

कटिहार:|कुमार नीरज:अगर आप विदेश दौरा करने को सोच रहे है तो होशियार हो जाइये  |

सरकार लाख दावा करले डिजिटल इंडिया साइनिंग इंडिया की लेकिन इनके मातस्त अधिकारी आज भी पुराने तरीके से ही कार्य कर रहे है |
इन्हें क्या सरकार आती है और जाती रहती है सरकार को ठेंगा दिखाना इनकी आदत सी है |


बिहार के छोटे शहर कटिहार में 900 लोग विदेश दौरे के लिये अपना पासपोर्ट रिनिवल होने या बनने दीये है लेकिन सरकारी बाबू की लापरवाही के चलते विगत चार महीनों से पार्सपोर्ट ऑफिस का चक्कर लगा रहे है |एक बुज़ुर्ग दम्पति पासपोर्ट को दुबारा बनाने के लिए सरकारी दूँगल का इंतज़ार कर रहे हैं  जिन्होंने 28 फ़रवरी को ही आवेदन आचार्य प्रोफेसर जगदीश चन्द माँझी ने किया था ।




जर्मनी मैं आयोजित होने वाले  ध्यान विज्ञान के आयोजन मैं मुख्य अतिथि  है  जहाँ जर्मनी के फ़्रैंकफ़ॉर्ट शहर 10 देशों के लोगों के साथ भातीय ध्यान ज्ञान विज्ञान के विषयो पर चर्चा करेगे लेकिन पासपोर्ट के लिए सरकारी दफ़्तरों के चक्कर लगाकर निराश हो चुके हैं | गृह मंत्री सुषमा स्वराज जी को भी ट्विटर पर लिखा गया। यह भारत के सॉफ्ट डिप्लोमेसी के लिए भी महत्वपूर्ण है।








जर्मनी में लोग बाँह फैलाये इनका इंतज़ार कर रहे हैं, टिकट भी भेज चुके हैं परंतु सारा मामला कटिहार मे सरकारी ड़ोंगल पे अटका हुआ है |इस मामले मैं जिले के पुलिस कप्तान ने भी माना 700 से 800 लोगों का सरकारी ड़ोंगल के चलते पेंडिंग पड़ा है | जल्द ही आने की उमीद है और इस प्रॉब्लम को खत्म कर दिया जायेग

 आचार्य जगदीस प्रसाद माझी जैसे लोग विदेश जाकर डिप्लोमेसी को ही बढ़ावा देंगे जिससे दोनो देशो के संबंध प्रगाढ़ होंगे ही साथ ही छोटे से शहर को विश्व के मानचित्र के पटल पर रखेगे ही जिसे देश दुनिया मैं भारत का नाम रोशन होगा |



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