Thursday, May 10, 2018

कटिहार नगर निगम का अजब खेल :मजदूर अपनी मजदूरी के लिए तड़पता रहा नगर निगम पार्षद मुम्बई औऱ गोवा घूमते रहे ।

पानी रे पानी तेरा रंग कैसा ? सवाल का जवाब चाहिए तो स्वागत है आपका कटिहार नगर निगम में | यहाँ बारिश का शुद्ध पानी भी नालों से मिलकर सड़कों पर नर्क का सैलाब पैदा कर देता है ,जिससे होकर यहाँ का टैक्स पेअर गुज़रने को मजबूर है| .कभी कभी तो डूब मरने को भी ... !

पर कमाल देखिए उसी टैक्स पेअर के पैसे से यहाँ के पार्षद समंदर के खाड़े पानी को भी रंगीन बना देते हैं ।|चौंक गए न ?. पर यह सच है ... और ये सच उजागर हुआ है महलेखकर के ऑडिट रिपोर्ट  में .|



नगर विकास विभाग के सचिव का एक पत्र वाइरल हो रहा है जिसमें स्पष्ट लिखा है कि सरकार के बिना पूर्वनुमती के मुंबई और गोवा घूमने में लाखों रुपए फूँक दिए गए |और इसकी वसूली सम्बंधित पार्षदों से की जाए । पर बात यहीं ख़त्म नहीं होती ऐसे दर्जनों वित्तिए मामलों पर प्रश्नचिन्ह लगाए गए हैं ।

 अब आगे देखिए ... सरकार कहती है की पंच फाउंडेशन का भुगतान रोका जाए पर भुगतान जारी रहता है |... मेअर साहब फ़रमाते हैं ग़रीब मज़दूरों का पैसा है | कैसे रोक दें ? पर मेअर साहब यह भूल जाते हैं की सैकड़ों नगारकर्मी सड़कों पर आंदोलन कर रहे हैं|.क्यूँकि उनका नियमित भुगतान नहीं हो रहा | उनके बच्चे पैसों के आभाव में भूख और बीमारी से मर रहे हैं .| क्या ये मज़दूर नहीं .?
.. सिर्फ़ पंच फ़ाउंडेशन के मज़दूर हीं मज़दूर हैं... दाल में तो ज़रूर कुछ काला है | इसका सबसे बड़ा सबूत है कटिहार नगर निगम के पदाधिकारी और माननीयों पर नगर विकास एवं आवास विभाग के तल्ख तेवर । तीन माह पूर्व महालेखाकार कार्यालय से जारी पत्र के सवालों से उलझ नगर निगम के पदाधिकारी व माननीय हल ढूंढने में लगे हैं।
हाल ही में नगर विकास एवं आवास विभाग से जारी पत्र में यहां हो रही धांधली और माननीयों के करतूतों का ब्यौरा पेश किया गया है। जिसमें स्पष्ट रूप से महालेखाकार के सवालों पर निगम के माननीय घिरते नजर आ रहे हैंै।

 फरवरी माह में जारी इस रिपोर्ट में बताया गया है कि एलईडी खरीद में जहां 3.78 करोड़ रूपए की गड़बड़ी सामने आई है वहीं दूसरी ओर सरकारी खर्चे पर पार्षदों की पूरी मंडली मुंबई और गोवा घूम आई और इसका हिसाब किताब का कहीं कोई जिक्र तक नहीं किया गया। जिससे सवाल उठना शुरू हो गया है।

बड़ा सवाल यह कि आखिर किस परिस्थिति में ऐसी लापरवाही की गई और इसकी जांच निगम स्तर पर ही क्यों नहीं हुई और तीन माह बीतने के बाद भी निगम पदाधिकारी व माननीय गंभीर क्यों नहीं हुए जबकि विकास के बड़े बड़े दावे किए जा रहे हैं। बता दें कि नगर विकास एवं आवास विभाग के विशेष सचिव ने बाकायदा पत्र प्रेषित कर नगर निगम बोर्ड से अनुमोदन कराकर जिला स्तरीय समिति की समीक्षा के बाद महालेखाकार पटना व विभाग को इसकी प्रति उपलब्ध कराने की सख्त हिदायत दी गई है। जिसके बाद निगम पदाधिकारी व माननीय के पसीने छूट रहे हैं।
हालांकि पत्र प्रेषण के बाद आनन फानन का दौर तेज हो गया है और निगम के करतूतों का चिट्ठा भी सबके सामने आ गया है कि जनता के पैसे को किस तरह बहाया जा रहा है। जबकि शहर में समस्याएं मुंह बाए खड़ी है और हमारे माननीय तमाम निमय कानूनों को ताक पर रखकर मुंबई और गोवा की सैर कर रहे हैं और उपकरणों की खरीदारी में भी बेफिक्री दिखाई जा रही है।


 महालेखाकार कार्यालय से जारी पत्र में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि 3.78 करोड़ रूपए के एलईडी खरीद में बिहार वित्त नियमावली के प्रावधानों का पालन नहीं किया गया। विभाग द्वारा उच्च स्तरीय जांच किए जाने और कार्रवाई अमल में लाए जाने – वार्ड पार्षदों का मुंबई और गोवा भ्रमण पर अनियमित रूप से 7.36 लाख व्यय किया गया। जिसकी पूर्वानुमति सरकार से नहीं ली गई। बोर्डिंग पास संचिका में संलग्न नहीं था। इसलिए यह राशि जिम्मेवार व्यक्तियों से वसूल कर उसे उचित शीर्ष में जमा करने का सख्त निर्देश दिया गया है |

आयकर की कम कटौती की नई राशि 01 लाख 24 हजार 879 की वसूली संबंधित व्यक्ति से करके उसे उचित शीर्ष में जमा करने संबंधी साक्ष्य संलग्न करने – बीमा की राशि 08 लाख 11 हजार 712 रूपए की वसूली संबंधित एजेंसी से करके उसे कर्मचारी राज्य बीमा निगम में जमा करने संबंधी साक्ष्य संलग्न करने
– एकरारनामा के अनुसार कार्य नहीं किए जाने के बावजूद भी पंच फाउंडेशन को लगातार राशि भुगतान के कारणों की जांच सक्षम पदाधिकारी से कराने व कार्रवाई सुनिश्चित करने
– वैट की राशि की कटौती नहीं करने के कारण 09 लाख 74 हजार 400 रूप्ए की हानि हुई, इस कारण राशि को जिम्मेवार व्यक्ति से वसूलकर उसे उचित शीर्ष में जमा करने
– सामान खरीद में बिहार वित्त नियमावली का पालन नहीं करने के कारणों की जांच सक्षम पदाधिकारी से कराकर कार्रवाई सुनिश्चित करने –
 85 लाख के डस्टबिन की खरीद में बिहार वित्त नियमावली का पालन नहीं करने के कारणों की जांच सक्षम पदाधिकारी से कराकर कार्रवाई सुनिश्चत करने
– वाहन मालिकों से आयकर की राशि 01 लाख 48 हजार 660 रूपए की वसूली कर उसे उचित शीर्ष में जमा करने
– नक्शा पारित करने में श्रम सेस की बकाया राशि 01 लाख 70 हजार की वसूली संबंधित व्यक्तियों से करके उसे उचित शीर्ष में जमा करने
– स्टाम्प शुल्क की बकाया राशि 02 लाख 52 हजार 573 रूपए की वसूली संबंधित व्यक्तियों से करके उसे उचित शीर्ष में जमा करने का साक्ष्य संलग्न करने
– योजना के गुणवत्तापूर्ण कार्यान्वयन नहीं हो सकने के कारणों की जांच सक्षम पदाधिकारी से कराकर कार्रवाई सुनिश्चत करने
– वैट की राशि 5318 की वसूली संबंधित व्यक्तियों से करके उसे उचित शीर्ष में जमा करने का साक्ष्य प्रस्तुत करने
– बकाया श्रम सेस की राशि 2086 की वसूली संबंधित व्यक्तियों से कराकर उचित शीर्ष में जमा करने
– नगर कोष में कम जमा की गई राशि 205 रूपए को नगर कोष में जमा करने का साक्ष्य संलग्न करने
 – योजनाओं के कार्यान्वयन में अतिरिक्त सुरक्षा जमा की राशि 02 लाख 12 हजार 213 रूपए की कटौती नहीं की गई, भविष्य में अनुपालन सुनिश्चत किए जाने का आदेश विशेष सचिव नगर विकास एवं आवास विभाग ने जारी किया है। वहीं इस मामले में वार्ड नंबर 28 के पार्षद किशन बजाज कहते हैं कि नगर निगम कटिहार भ्रष्टाचार का अड्डा बन चुका है। आमजनों के हित की बात अब मंद पड़ चुकी है और सरेआम लूटखसोट की राजनीति शुरू हो चुकी है।

 इसपर किशन बजाज का कहना है कि पसीना देख रहे हैं ? डर से छोट रहा है |किसी की हिम्मत नहीं बोले कुछ| फंसा देंगे|


 वहीं मेयर कहते हैं की ...
Katihar Mayor Bijay Singh
नगर निगम द्वारा यदि लापरवाही बरती गई है तो बेशक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। फिजुल व्यय की गई राशि की वसूली की जाएगी। जल्द ही टीम का गठन कर सारी रिपोर्ट तैयार की जाएगी।

 पर कब तक इस सवाल पर बगले झाँकने लगते हैं ... विदित हो कि ये वित्तिए अनियमितता १५-१६ में हुई और दो साल से अधिक गुज़र जाने के बाद भी अब तक कार्रवाई सिफ़र रही ... अंत में मजबूर हो कर इस वर्ष फ़रवरी में विशेष सचीव को ख़ुद पत्र जारी करना पड़ा ... पर फिर भी कार्रवाई कहीं नज़र नहीं आ रही है|



कुमार नीरज


  ©www.katiharmirror.com
Post a Comment

Get Katihar Mirror on Google Play

Katihar News App (Katihar Mirror) https://play.google.com/store/apps/details?id=sa.katiharmirror.com

Scroling ad