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वीर कुंवर सिंह का विद्रोह बना किसानों के लिए वरदान : सगीर

1857 क्रांति के महानायक वीर बाबू कुंवर सिंह का विजयोत्सव स्थानीय बरमसिया शोभा सभागार में नगर अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ द्वारा विजयोत्सव पर विचार गोष्ठी आयोजित की गयी जिसकी अध्यक्षता मोहम्मद वाहिद आलम ने की।

 इस मौके पर मुख्य अतिथि के रुप में अल्पसंख्यक प्रदेश महासचिव मोहम्मद सगीर तथा विशिष्ट अतिथि के रुप में पंचायती राज प्रकोष्ठ के प्रदेश उपाध्यक्ष श्री विजय यादव मौजूद थे| ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्र के राजद नेताओं एवं कार्यकर्ताओं ने उनकी चित्र पर माल्यार्पण किया एवं उनके कृत्य को याद किया।
इस अवसर पर श्री सगीर ने कहा कि अपनी उम्र के 80 वर्ष के पड़ाव पर जगदीशपुर के जमींदार बाबू कुंवर सिंह ने छोटे भाई अमर सिंह के साथ 12 जून 1857 को अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ विद्रोह का बिगुल फूंक दिया। अंग्रेज अधिकारी विंसेंट आयर एवं विलियम टेलर को विद्रोह दबाने की जिम्मेवारी मिली, लेकिन उन्होंने अंत तक छापामार तरीके से युद्ध को लड़ते रहे। वर्षात के महीने में जब आसमान से बादल बरस रहे थे और बिजली कड़क रही थी तो भोजपुर की मिट्टी में बाबू कुंअर सिंह की तलवार की खनखनाहट अंग्रेजों को लहूलुहान करते हुए विजय प्राप्त करती रही। । दानापुर छावनी में मंगल पांडेय के नेतृत्व में सिपाही विद्रोह के बाद विशाल सोन नदी का दोनों किनारा धधक उठा था। युद्ध के दौरान जख्मी हुए अपने बाजू को गंगा की भेंट कर देने के उपरांत बाबू कुंवर सिंह की शहादत बेकार नहीं गयी थी और अंग्रेजों का विरोध चरम पर चलता रहा, जिसे दबाने के लिए डेहरी में बैठा अंग्रेज अधिकारी सी एच डिकेंस ने अंग्रेजी हुकूमत को 1868 में नहर निर्माण की योजना बताई ताकि पानी के रास्ते से विद्रोहियों तक पहुंचा जा सके और लोगों को खेती बाड़ी में उलझाकर आंदोलन को कमजोर बनाया जा सके। इस प्रस्ताव को अंग्रेजी सरकार ने मान लिया। क्योंकि डेहरी में अंग्रेजों का सैनिक पड़ाव मौजूद था। जहां से अंग्रेजी पुलिस को शाहाबाद के किसी कोने तक आसानी से पहुंचाने में मदद मिलती। उस फौजी अभियंता की योजना पर 1870 में सोन नदी पर बांध निर्माण कर नहर निर्माण किया गया। महज 4 वर्षों में यह योजना पूर्ण हो गयी और स्टीमर व नाव के माध्यम से अंग्रेज पुलिस शाहाबाद में चौकसी करने लगे। बाद में यही नहर शाहाबाद और फिर बाद में औरंगाबाद से पटना तक खेतों की सिंचाई व्यवस्था के रूप में अपनायी जाने लगी और किसानों के लिए आज वरदान साबित हो रहा है। श्री विजय यादव ने अपने संबोधन में कहां की वीर कुंवर सिंह ने अंग्रेजो के खिलाफ आजादी की आग सुलगा दी थी यही आग धीरे धीरे पूरे भारत के जनमानस तक फैल गया और अंग्रेज भारत छोड़ने को मजबूर हो गया और अंततः लाखों आजादी के दीवाने की शहादत हुई और हमारा भारत विश्व में एक आजाद देश के रूप में स्थापित हुआ उनके योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता |

हमें उनके पदचिन्हों पर चलकर आज के अराजक स्थिति पैदा करने वाले दानवों के खिलाफ एकजुट होकर लड़ने के लिए तैयार होना चाहिए और उनके सपनों को पूरा करने के लिए अग्रसर होना चाहिए आजादी के 70 साल पूरा हो जाने के बावजूद आज हमारा समाज मूलभूत समस्याओं से जूझ रहा है तत्कालीन सरकार हमारे नवयुवकों को हमारे किसानों को झूठे वादों के माध्यम से मूल मुद्दों से भटका रही है और जाति-पाति के नाम पर समाज को बांट कर भारत के भविष्य को बर्बाद करने का कोशिश कर रहा है जो कि हमारे देश के हित में नहीं है हमें एकजुट होना पड़ेगा और इन फासीवादी हिटलरशाही सामंतवादी विचारधारा के लोगों को अंग्रेज की तरह खदेड़ना पड़ेगा तभी सही मायने में आजादी का सपना पूरा होगा|

 इस अवसर पर राजद आदिवासी नेता अजय मुर्मू उर्फ जेठा महिला जिला उपाध्यक्ष मंजू देवी जिला महिला महासचिव पूजा कुमारी अल्पसंख्यक जिला उपाध्यक्ष मोहम्मद हुसैन आलम वार्ड अध्यक्ष अजरुद्दीन वसीम रजा मोहम्मद नजीर मोहम्मद शकील इंतखाब हसन सिराज खान तुफैल रजा चांद अंसारी मुनीर आलम मोहम्मद निषाद सोहेल मनीष झा मुर्तुजा आलम रईस आलम बबलू हंसराज मजहरुल हक मुजीबुर्रहमान अनिल राव आसिफ अली शाहबाज आलम राजद नेता संजीत यादव शफीकुर्रहमान सरफरोज रियाज शेख रब अंसारी रब अंसारी अफजाल अंसारी अवनीश कुमार सोनू मेहता बाबर आलम वाहिद अली मोहम्मद विक्की मुकद्दर अली राजद युवा नेता चिंटू यादव एवं सैकड़ों कार्यकर्ता ने भाग लिया|

Kumar Neeraj

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