Katihar मौजूद हैं सैलाब के जख्म मरहम के इंतजार में आज भी बाढ़ पीड़ित


आज़मनगर:रेत से पटा खेत
तुषार शांडिल्य:-कटिहार/आजमनगर  आजमनगर प्रखंड के कई ऐसे पंचायत हैं.जहां पहुंचने के लिए मुख्य मुख्य सड़कें बीते14अगस्त को बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल सालमारी अंर्तगत चार जगहों व कटिहार डिवीजन में एक जगह भीषण
बाढ़ आने की वजह से दशकों पुराने कमजोर तटबंध को पानी की तेज प्रवाह उड़ा ले गयी जिससे आजमनगर प्रखंड के 28सों पंचायत जलमग्न हीं नहीं हुआ बल्कि कई जगहों पर पक्की कच्ची सड़कें कट गयी |

कलवर्ट,कच्चे पक्के मकान,गिड़ गए,हजारों हेक्टेयर में लगे किसानों की फसलें हीं नहीं उनके अरमान भी पानी में डूब गए| इस तबाही के पांच माह बाद भी बाढ़ पीड़ितों के मन में सैलाब के जख्म जिंदा हैं|जिस पर पूर्णरूप से मरमहम लगा पाने में प्रसाशन नाकाम दिख रहा है|जीआर राशि बाढ़ पीड़ितों के खाते में गयी तो जरूर लेकिन ऐसे कई बाढ़ पीड़ित आज भी जीआर राशि के इंतजार में टकटकी लगा बैठे हैं|जिसे इसकी शख्त जरूरत है|

सर्वेकर्ता ने यहां चेहरा देख सर्वे किया यही वजह कि जिसे इसकी जरूरत थी ,उसे नहीं मिली जीआर की राशि जब कि हुक्मरान के नौकर शाह सभी बाढ़ पीड़ितों के खाते में जीआर राशि भेजने का दावा करती है|जो  जांच का विषय है.14 अगस्त की रात आई भीषण तबाही की बाढ़ लोगों को यह उम्मीद नहीं था.बांध टूटने से तबाही इतनी भयानक होगी |तबाही के आलम को आज भी खेतों में पड़े रेत की मोटी चादर,गिरे कच्चे पक्के मकान,ध्वस्त सड़कें उड़े कलवर्ट आज भी चींख-चींख कर तबाही के मंजर को बयां कर रहा है|

ध्वस्त मकान
बावजूद इसके प्रशासनिक अधिकारी अब तक कुंभकर्णी नींद में सोई हुई है|ना तो ध्वस्त सड़कों की मरम्मत की गई है.और ना हीं उड़े कलवर्ट का पुनः निर्माण हीं कराया गया है.|आजमनगर प्रखंड के एक गांव ही नहीं कई ऐसे गांव है जो एक दूसरे से संपर्क में पांच माह बाद भी नहीं है.यहां पहुंचने का एकमात्र साधन उबर खाबर व क्षतिग्रस्त सड़कें रह गयी है.जहाँ चार चक्के वाहनों के अलाइनमेंट बिगड़ना तय है.कुछ ऐसे गांव भी हैं.जहाँ एक गांव से दूसरे गांव जाने के लिए नांव हीं एक मात्र साधन है.नांव परिचालन के जरिये हजारों लोगों का रोजाना आना जाना लगा रहता है.इन सब बातों से प्रशासन बेखबर क्यों है.जब कि बाढ़ के समय आजमनगर पहुँचे डीएम मिथिलेश मिश्र ने यहां की जनता से वादा किया था.बाढ़ का पानी नीचे जाने के बाद जल्द हीं ध्वस्त सड़कों को ठीक करवा दिया जाएगा फसल क्षतिपूर्ति की राशि पीड़ित किसानों को मिलेंगे लेकिन ऐसे सभी तमाम वादे जो डीएम ने बाढ़ पीड़ितों से कर गए थे.ढाक के तीन पात शाबित हो रहा है.जब कि डीएम से लोगों को काफी उम्मीदें थी.कई सरकारी घाटों पर सरकारी नावों से ओवर लोड नावों का परिचालन भी होता है.बिहार में कई नाव हादसे हुए हैं कई जानें गई हैं.लेकिन बावजूद इसके प्रशासन ओवरलोड नाव परिचालन पर रोक लगा पाने में नाकाम शाबित हो रहा है.जो भविष्य में कभी बड़े नाव हादसे का कारण बन सकता है. चचरी पुल कच्ची सड़क जीवन की है डोर:- यह सच है प्रखंड में कई मुख्य सड़कें कलवर्ट ध्वस्त हो गयी है.इससे लोगों को आवागमन में काफी परेशानी होती है.यहाँ प्रसाशनिक मरम्मती कार्य हासिये पर चली गयी है. गिरे पक्का मकान ध्वस्त सड़कें बयां करती त्रासदी:- आजमनगर प्रखंड के  में बाढ़ आने से दो मंजिली भवन देखते देखते जमींदोज हो गयी वहीं हरनागर पंचायत स्थित एक मंजिली भवन भी आंशिक रूप से जमींदोज हो गयी आजमनगर प्रखंड में ऐसे कई कच्चे पक्के मकान भीषण बाढ़ में जमींदोज हो गयी जो आज पांच माह बाद भी तबाही के जख्म को बयां करती है. बाढ़ पीड़ितों को अब भी मदद का इंतजार:- खेती और मजदूरी महानंदा बेसिन की अव्यवस्था की धूरी है. सैलाब आया तो खेती तो सैलाब के साथ बह गई.परिणाम यह हुआ कि मजदूरी भी समाप्त हो गई ऐसे में लोगों को बदहाली से उबरने के लिए सरकारी मदद का इंतजार पांच माह बाद भी है. लेकिन इंतजार को दूर करने का प्रयास प्रशासनिक अधिकारी या हुक्मरान नहीं कर रहे हैं.बाढ़ के ₹6000 जीआर राशि के रुप में लोगों को उपलब्ध तो करा दिया गया लेकिन सच्चाई यह है.कि सैलाब में जिस स्तर की बर्बादी सामने आई या बर्बादी हुई उस अपेक्षा हुक्मरान राहत पहुँचा पाने में नाकाम साबित हुआ है.मदद के रूप में मिली राशि से भोजन करें या बनाये आशियाना  एक बड़ा सवाल बाढ़ पीड़ितों के सामने खड़ी हो गई है.कई लोगों की अपनी शिकायतें हैं.कि जीआर की राशि नहीं मिली मजदूरों को मजदूरी नहीं मिल रही है.इससे मजदूरों का पलायन दूसरे प्रदेशों में जोर पकड़ सकता है.  नहीं शुरू हुआ है तटबंध का मरम्मत कार्य:- बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल सालमारी अंतर्गत चार जगहों पर बीते14 अगस्त को आई प्रलयंकारी बाढ़ की चपेट में चार जगह तटबंध टूट गए जिससे भीषण तबाही हुई जान माल के भी नुकसान हुए सरकार ने राहत राशि देकर जख्म पर मरहम तो लगा दिया लेकिन भरपाई ना कर पाया लोग आज भी पूर्ण राहत प्राप्ति को लेकर टकटकी लगाए बैठे हैं तटबंध टूटे पड़े हैं जिसकी मरम्मत विभाग के द्वारा अब तक शुरू नहीं किया गया है इसके लिए विभाग के जानकार समय आने पर मरम्मत की बात कहते  हैं.

  सभी किसानों को नहीं मिली फसल क्षति की राशि:-- आजमनगर:- आजमनगर प्रखंड में आई बाढ़ में किसानों को फसल क्षतिपूर्ति की राशि वितरण के लिए सूत्रों के मुताबिक15करोड़ रुपये से की राशि आवंटित आजमनगर को प्राप्त हुआ है.विभागीय आंकड़ों के मुताबिक तकरीबन 11हजार112हेक्टेयर के विरुद्ध15करोड़35लाख रुपये आवंटन प्राप्त हुए हैं.जिसके लिए  नौ पंचायतों का विपत्र कोषागार बारसोई को समर्पित किया गया है|आजमनगर कृषि पदाधिकारी अजीत कुमार ने बताया कि तकरीबन 2करोड़ की निकासी हो चुकी है|एक करोड़45 लाख रुपये बैंक को भेजे गए हैं|शेष राशि हस्तानांतरित करने की दिशा में कार्रवाई चल रही है|कुल14,284किसानों के फसल क्षतिपूर्ति की राशि प्रखंड से भेजी गई जिसकी जांच प्रक्रिया चल रही है|

जांच में दस्तावेज फर्जी पाए जाने पर सम्बंधित किसानों के भेजे गए रिपोर्ट को रद्द कर दिया जाएगा जिसमें प्रखंड द्वारा भेजे गए किसानों के आंकड़ों में तब्दीली भी हो सकती है. आजमनगर में कुल 82हजार बाढ़ पीड़ित जीआर राशि से होंगे लाभान्वित:- जीआर राशि कुल79423बाढ़ पीड़ितों के खाते में भेज दी गयी है.शेष 2577 बाढ़ पीड़ितों के खाते में जीआर राशि भेजे जाने की प्रक्रिया युद्ध स्तर पर है.जल्द हीं राशि शेष पीड़ितों के खाते में चली जायेगी विदित हो आजमनगर प्रखंड में कुल 82हजार बाढ़ पीड़ित की सूची जीआर राशि में चयनित किया गया है.

 दो वर्षों से विद्धापेंशन की आश में वृद्धा:- आजमनगर प्रखंड क्षेत्र के विभिन्न पंचायतों की वृद्ध महिलाओं को दो वर्षों से इस मद की राशि नहीं मिली है.इसी कड़ी में बीते दिनों प्रखंड मुख्यालय पहुँच जोकर पंचायत की वृद्धाओं द्वारा पेंशन की राशि नहीं मिलने को लेकर विरोध जताया था.पेंशन नहीं मिलने से ठंड में कंबल नहीं खरीद पा रही है. पेंशनधारियों ने पंचायत सचिव विनोद कुमार सिंह की लापरवाही के कारण विगत दो वर्षों से वृद्धावस्था,विकलांग तथा विधवाओं को पेंशन की राशि भुगतान नहीं हो पाई है.वहीं जन्म मृत्यु प्रमाण पत्र भी समय पर नहीं बन पा रहा है.पंचायत सचिव सिंह पंचायत क्षेत्र में दर्शन देने भी नहीं पहुंचते हैं.जो जांच का विषय है.वृद्धावस्था पेंशनधारियों द्वारा बीडीओ को एक आवेदन देकर वृद्धावस्था पेंशन की राशि के भुगतान की मांग जल्द किये जाने की मांग की है.संबंध में बीडीओ पूरण साह ने बताया प्रखंड स्तर पर कागजी प्रक्रिया पूरी कर दी गई है.परंतु खाते में हीं वृद्धावस्था पेंशन की राशि भुगतान होना है. समस्या खड़ी कहाँ हो रही इस पर मंथन किया जा रहा है.विरोध जताने वालों में मोहिम मंडल, शंभू मंडल,चंद्रमोहन रजक, तुलसी देवी,तारा देवी,रामदेव पासवान,कामिनी देवी,जोकर पंचायत के उप मुखिया रंजीत प्रसाद मंडल,सुहागी देवी ,समाजसेवी रूपेश कुमार शर्मा ,संजय शर्मा,अशोक शर्मा ,पूर्व प्रमुख मुख्तार अंसारी,वाड स्दसय पुरण मडल,अनुज मालाकार,दुर्गी देवी,  बाबूलाल टुडू,आदि कई वृद्धा उपस्थित थी.इनको बीडीओ साह से उम्मीद है.कि जल्द हीं भुकतान कराएंगे.

   कहते हैं बीडीओ:- बीडीओ पूरण साह ने कहा शेष बाढ़ पीड़ितों के खाते में जीआर राशि भेजे जाने की प्रक्रिया चल रही है.जल्द हीं भुकतान कर दिया जाएगा.इस दिशा में भी कार्य चल रहा कि वृद्धा पेंशन की राशि उनके खातों में क्यों नहीं गयी इस पर मंथन किया जा रहा है. कहते हैं बीएओ:- प्रखंड कृषि पदाधिकारी अजीत कुमार ने बताया कि फसल क्षतिपूर्ति मद में प्रखंड को15करोड़ रुपये प्राप्त हुए हैं. नौ पंचायत के किसानों के विपत्र कोषागार बारसोई को समर्पित किया गया है.प्रखंड से कुल14,284किसानों के फसल क्षतिपूर्ति की राशि प्रखंड से जिला को भेजी गई है.जिसकी जांच प्रक्रिया चल रही जांच में जिस किसान के दस्तावेज फर्जी पाए जाएंगे वैसे किसानों के प्रखंड से भेजे प्रस्ताव को रद्द कर दिया जाएगा जिसमें प्रखंड द्वारा भेजे गए किसानों के आंकड़ों में तब्दीली भी हो सकती है.इसके लिए संबंधित किसान खुद जिम्मेवार होंगे|
Tushar Sahandilya
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