Katihar इन्सान और पंछी का अनोखा रिश्ता

कहते है इंसान किसी जानवर को भी पाल ले तो वो परिवार का सदस्य जैसा ही लगता है|मिट्ठू की कहानी भी कुछ ऐसी ही है|
कटिहार शहर के जयपकाश नगर मोहल्ले में एक अनोखा मामला प्रकाश में आया है। जहां दीपावली के मौके पर लोग खुशियों से भरा त्यौहार मना रहे थे। वही एक परिवार गम माहौल में शौक मना रहे थे। कारण उनका तोता मिट्ठू की मौत। जानकारी अनुसार जयप्रकाश मोहल्ले के स्थानीय निवासी मनोज गोस्वामी और उनके परिवार के सदस्य अपने तोता मिट्ठू के मौत के कारण ना ही दीपावली मनाई, ना ही दीए जलाए और ना ही बच्चों ने पटाखे छोड़े और ना ही घर में दीपावली के मौके पर खाना बना। मिट्ठू तोता से इनका लगाव इतना गहरा था कि यह अपने मिट्ठू को अपने बेटे की तरह मानते थे और घर के सदस्य भी इन्हें एक सदस्य के रूप में मानते थे। घर में जिस तरह सभी परिवार रहते थे। उसी तरह मिट्ठू भी एक सदस्य के रूप में रहता था औरों की तरह तोता मिट्ठू लिए भी सभी सुविधा उपलब्ध थी। वही इस परिवार से बात की गई तो परिवार के मुखिया मनोज गोस्वामी ने बताया कि 8 साल पहले 2009 को मंगलवार के दिन एक तोता का बच्चा जख्मी हालत में उड़ते-उड़ते घर के पास आ गिरा।

घायल तोता को देख कर श्री गोस्वामी ने तोते का उपचार कर तोते का नाम मिट्ठू रखा। उपचार होने के बाद तोता मिट्ठू मनोज गोस्वामी के घर में सदस्य की तरह रहने लगा मनोज गोस्वामी के परिवार वाले इन्हें बेटा, भाई के रूप में मानने लगे। मनोज गोस्वामी की पत्नी रंजीता देवी मिट्ठू को एक पक्षी के रूप में नहीं एक बेटी के रूप में अपने साथ हमेशा रखते थे वही उनके बच्चे आदित्य गोस्वामी, राहुल गोस्वामी, छोटू गोस्वामी, किशन गोस्वामी मिट्ठू को सगे भाई की तरह मानते थे। इस परिवार के लोगों का मिट्ठू के प्रति प्यार देखकर आस पड़ोस में काफी चर्चा का विषय बन गया। घर के सदस्य जब तक मिट्ठू को खाना नहीं खिलाते तब तक वह लोग खाना नहीं खाते थे। वही मिट्ठू तोता भी गोस्वामी परिवार को अपने परिवार की तरह समझते थे और हमेशा उनके साथ ही रहते थे। मिट्ठू और गोस्वामी परिवार का लगाओ इतना था कि मिट्ठू को पिंजरे में बंद नहीं रखा जाता था। वह हमेशा आजाद पंछी की तरह घर में इधर उधर उड़ता रहता था। मिट्ठू की मौत हो जाने से घर के सदस्यों में मनोज गोस्वामी रंजीता देवी और उनके बच्चों में गम का माहौल है तोता की मौत हो जाने के कारण गोस्वामी परिवार में दीपावली जैसे पर्व को नहीं मनाया और साथ ही जिस तरह किसी मनुष्य की मौत हो जाती है और उनका क्रिया कर्म किया जाता है। ठीक उसी प्रकाश गोस्वामी परिवार ने मिट्ठू के मौत के बाद मिट्ठू की आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना की और मनुष्य की तरह क्रिया कर्म किया। 
 इसके बाद गोस्वामी परिवार उनका 13 दिन वाला क्रिया कर्म और श्राद्ध सुपनडी आदी करने वाले हैं। इस परिवार के तोते के प्रति लगाव देख कर आस पड़ोस के लोगों को भी काफी दुख व्यतीत कर रहे हैं। क्योंकि आस पड़ोस के लोग भी इस तोते से काफी लगाव हो चुका था। आज मिट्ठू तोता के क्रिया कर्म में पूरे गोस्वामी परिवार के साथ साथ आस पड़ोस के लोग भी शामिल हुए। साथ ही उनके श्राद्ध में भी शामिल होने  जा रहे हैं।  तोता मिट्ठू के घायल हो जाने के बाद मनोज गोस्वामी ने पशुपालन विभाग के डॉक्टर प्रेम कुमार के आवास पर मिट्ठू को इलाज के लिए लेकर गए |वहां प्रेम कुमार ने मिट्ठू को जांच कर दवाई और मरहम पट्टी की लेकिन मिट्ठू के सर पर गहरी चोट लगने के कारण इलाज के क्रम में ही मिट्ठू की मौत हो गई। मिट्ठू के मौत हो जाने के कारण परिवार के सदस्य को काफी दुख हुआ और मिट्ठू के लिए काफी रोए साथ ही आस पड़ोस के लोग भी मिट्ठू के लिए काफी दुख व्यक्त किए। इस घटना के बाद एक पंछी और मनुष्य के प्यार के प्रति कितना स्नेह है। आज गोस्वामी परिवार ने दर्शा दिया और समाज में एक अलग संदेश दिया।
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