शेयर करे

Katihar मिथिलांचल की परम्परा मधुश्रावनी पूजा

Madhushramni Puja 
 मिथिलांचल की परंपरा से जुड़ी है मधुश्रावणी पूजा। यह पूजा तेरह दिनों तक लगातार चली  हर सुहागिन इस पूजा को विधि-विधान से करती हैं लेकिन यह विशेष रूप से नवविवाहिता बड़े धूम धाम से करती है ।  विवाह के बाद पहले सावन में होने वाली इस पूजा का अलग ही महत्व है।

मिंट्टी के बने नाग-नागिन की होती है पूजा

पूजा शुरू होने से पहले दिन नाग-नागिन जिनको बिसहारा के नाम से जानी जाती है , हल्दी के गौरी बनाने की परंपरा है। 13 दिनों तक हर सुबह शाम नवविवाहिताएं फूल और पत्ते तोड़ने जाती हैं। इस त्यौहार के साथ प्रकृति का भी गहरा नाता है। मिंट्टी और हरियाली से जुड़े इस पूजा के पीछे आशय पति की लंबी आयु होती है।




नव विवाहिता के ससुराल से आती है पूजन सामग्री

यह पूजा नवविवाहिताएं अपने मायके में ही करती हैं पूजा शुरू होने से पहले ही उनके लिए ससुराल से सोलह श्रृंगार के प्रसाधन के साथ पूजा के फल फूल मिठाई आती है साथ ही जिसमें साड़ी, लहठी (लाह की चूड़ी), सिन्दूर, धान का लावा, जाही-जूही (फूल-पत्ती) होता है।

कुलदेबी के साथ साथ माता गौरी के गीत 

सुहागिनें फूल-पत्ते तोड़ते समय और कथा सुनते वक्त एक ही साड़ी हर दिन पहनती हैं। पूजा स्थल पर अरिपन (रंगोली) बनायी जाती है। फिर नाग-नागिन, बिसहारा पर फूल-पत्ते चढ़ाकर पूजा शुरू होती है। महिलाएं गीत गाती हैं, कथा पढ़ती और सुनती

 गौरी पर नहीं चढ़ता बासी फूल

ऐसी मान्यता है कि माता गौरी को बासी फूल नहीं चढ़ता और नाग-नागिन को बासी फूल-पत्ते ही चढ़ते हैं। मैना (कंचू) के पांच पत्ते पर हर दिन सिन्दूर, मेंहदी, काजल, चंदन और पिठार से छोटे-छोटे नाग-नागिन बनाए जाते हैं। कम-से-कम 7 तरह के पत्ते और विभिन्न प्रकार के फूल पूजा में प्रयोग किए जाते हैं।⁠⁠⁠⁠



-Kumar Neeraj

www.katiharmirror.com
एक टिप्पणी भेजें
शेयर करे

Popular Posts

Featured Post

बाइकसवार की पिकउप गाडी की चपेट में आने से मौत

कटिहार/बरारी/नरेश चौधरी :---कटिहार के बरारी प्ररवंड के उचला चौक के गंगा दार्जलिंग सड़क पर बाइक सवार राकेश यादव,और रंजन कुमार की पिकउप गाड़ी क...

Blog Archive