Monday, February 12, 2018

katihar महाशिवरात्रि विशेष :मनिहारी का प्राचीन शिव मंदिर


मनिहारी :प्राचीन शिवमंदिर
मनिहारी नगर पंचायत मे अवस्थित सबसे पुराना गौरी शंकर महादेव का यह शिव मंदिर जो जिसकी शिवलिंग पन्द्रह सौ साल पुराना है और यह शिव लिंग जो संयुक्त अर्द्धनारीश्वर का स्वरूप मे और काफ़ी प्राचीन और प्रशिद्ध है ,जिसका वर्णन पूर्णिया गजेटियर के सन 1905 ईस्वी मे वर्णित है |
इस दुर्लभ शिवलिंग की खासियत यह है की शिव पार्वती एक ही शिव लिंग मे है ।
50 के दशक मे जब बंगाल के पूर्व विधान सभा अध्यक्ष और विख्यात पुरातत्ववेत्ता सुनीति कुमार चटर्जी मनिहारी आये तो उन्होने इस गौरी शंकर शिवमंदिर का दर्शन करते हुए कहा था कि यह शिवलिंग 15 सौ पुराना है ,वहीँ पूर्णिया गजेटियर के अनुसार मनिहारी के पुरानी बजार स्थित एक साहूकार कन्हैंयालाल अग्रवाल को शंकर भगवान ने स्वप्न मे आकर ये बताया था कि गंगा नदी से सटे एक सरोवर के किनारे शिवलिंग पड़ी है जिसकी स्थापना करवा दो |सूबह जब सेठ जी आँखे खुली तो उन्होने भगवान शिव द्वारा स्वप्न मे और बताये गये उक्त स्थल का निरीक्षण किया तो उन्हे जंगल मे शिवलिंग रखी हुई मिली (वर्तमान मे जहाँ मंदिर है )|
उसके बाद उक्त शिवलिंग को विधि और श्रधा पूर्वक स्थापना कर दी गई ,और साथ ही उक्त मंदिर के रखरखाव और उसकी पूजा -पाठ के निमित्त मनोहरपुर पंचायत अन्तर्गत स्वर्गीय सेठ कन्हैंयालाल ने उस समय लगभग 11 एकड़ खेती योग्य ज़मीन मंदिर के नाम कर ट्रस्ट बनवा दी गई है जिसका आर एस खतियान भी मंदिर के नाम से दर्ज है |और वर्तमान मे यह मंदिर बिहार राज्य धार्मिक न्यास बोर्ड पटना के अन्तर्गत है ,और जिसके पदेन अध्यक्ष पहले बीडीओ हुआ करते थे और बाद मे अंचल पदाधिकारी को पदेन अध्यक्ष बनाया गया है !
Manihari Katihar Shiv Mandir

वहीँ इस प्राचीन शिवलिंग के बारे मे ऐसी मान्यता है कि इस मंदिर के शिवलिंग को णर्वेद्स्वर के नाम से जाना जाता था । मनिहारी के वरिष्ठ अधिवक्ता प्रदूम्न ओझा कहते है कि यह शिवलिंग बहूत ही प्राचीन काल की है और इस मंदिर ट्रस्ट को खेती योग्य ज़मीन काफ़ी जमीन है लेकीन लोगों ने अपने स्वार्थ से वशीभूत होकर इस मंदिर की ज़मीन को हड़पने की साजिश मे लगे हुए है ,इस प्रचीन शिवलिंग मंदिर के रखरखाव अब यहाँ जनसामान्य लोगों द्वारा किया जा रहा है ,और मंदिर के परिसर मे अन्य दो मंदिर निर्माणधिन है लेकीन हमे ये महसूस होता है कि कही नवनिर्माण के नाम पर ये प्राचीन शिवलिंग वाली गौरी शंकर मंदिर अपना अव्स्तीत्व ना खो दे ! प्रशासन की और से इस मंदिर को लेकर कोई पुख्ता इंतजाम नहीँ किया गय़ा लेकिन गनीमत है कि थाना के बिल्कुल समीप होने के कारण खुद ब खुद सुरक्षा हो जाती है |

 महा शिव रात्रि के अवसर पर इस मंदिर के रंग -रोगन करते हुए सजाने की तयारी भक्तो द्वारा की जाती है और इस अवसर भगवान शिव की बारात भी नीकाली जाती है !,इस मंदिर मे नगर क्षेत्र के अलावे दुर से भी लोग आकर शिवलिंग मे जलाभिषेक कर पूजा अर्चना करते है और शिव रात्रि सहित सोमवारी और अन्य मौके पर इस मंदिर मे श्रधालुओं की भारी भीड़ होती है ! और इस अवसर पर यहाँ मेला भी आयोजित की जाति है ! इस सम्बन्ध मे यहाँ के एक बर्तन व्यवसाई भोला चौरसिया कहते है कि इस मंदिर मे अपार शक्ति है ,मनोकामना पूर्ण होने पर कटिहार शहर के व्यवसाय से जुड़े कुछ लोगों ने हाल फिलहाल श्रधालुओं के पीने के लिये शुद्ध पेय -जल की व्यवस्था करते हुऐ मंदिर मे पानी टंकी मोटर एवम नलकूप भी लगाये गये है !


Kumar Neeraj
©www.katiharmirror.com

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